Friday, November 16, 2018

मेरे ब्लॉग में आपका स्वागत है
मैं इस बारे में चर्चा करने जा रहा हूं कि अभिनय में सुधार कैसे किया जा सकता है। जो लोग अभिनेता बनना चाहते हैं उन्हें अभिनय पर कड़ी मेहनत करनी चाहिए। एक Actor के स्वर होने चाहिए Strong, Flexible और Controlled. अगर सुरों पर आपकी पकड़ नहीं तो आप अपने डायलॉग्स में Variations नहीं ला पाएंगे। अपने speech pattern को तोड़ नहीं पाएंगे। सुरों पर control हासिल करने के लिये अभिनेता गाने सुने, और उनके साथ गुनगुनाये। शब्द गुनगुनाना आवश्यक नहीं, गाना याद है या नहीं, ज़रूरी नहीं। चलते हुए गीत के सुर पकड़िये और साथ गाते रहिये। कुछ ही दिनों में असर देखिएगा, आप सरगम के हर सुर को आसानी से पकड़ने लगेंगे।
आप यदि Actor हैं तो आपके लिए एक Exercise है। आप एक स्केच बुक खरीदें और किसी भी जगह बैठ कर वहां के नज़ारे का Sketch बनायें। ख़राब बने तो भी बनाएं। इससे आपका हाथ सधेगा। आपकी observation बढ़ेगी। फिर आप किसी scene को imagine करके Sketch बनायें, इससे आपकी imagination मज़बूत होगी। ज़हन में इमेज बनाने और देर तक बनाये रखने से आपकी visualisation मज़बूत होगी। और अभिनेता के लिए ज़हन में visuals बनाना बहुत ज़रूरी है।
अभिनेता जब डायरी लिखता है, तो वो दिनभर हुई घटनाओं को फिर से याद करता है जिससे उसके ज़हन में उन घटनाओं की तस्वीरें पैदा होती हैं। रोज़ाना डायरी लिखने से Actor की imagination और visualisation की क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा जब एक्टर को ये ज्ञात होता है कि उसे शाम को डायरी लिखनी है, तो वो दिनभर होती घटनाओं को ग़ौर से observe करता है। इस तरह Actor की Observation power भी मज़बूत होती है। रोज़ाना डायरी लिखें, और इन बिंदुओं को ध्यान में रख कर लिखें : When - समय What - घटना क्या थी Where - वो जगह कौन सी थी How - घटना का सारांश (with details) Why - आपके action/reaction का Motive क्या था Feeling - उस वक़्त कैसा महसूस हुआ (भाव का नाम) यक़ीन कीजिये, डायरी लेखन आपकी एक्टिंग में ज़रूर काम आएगा।
अच्छा Actor बनने के लिए आपको ख़ुद पर काबू पाना होगा। ख़ुद को जैसा चाहे इस्तेमाल करना सीखना होगा। * आप ख़ुद क्या-क्या करते हैं, कैसे और क्यों करते हैं, नज़र रखिये। * आप क्या-क्या बोलते हैं, कैसे और क्यों बोलते हैं, नज़र रखिये। * आपकी tone कैसी है, कौन से सुरों का आप ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं, नज़र रखिये। * आप बोलने के लिए शब्द कौन से चुनते हैं, नज़र रखिये। * आप के भाव कैसे और क्यों बदलते हैं, नज़र रखिये। * भाव बदलने पर आपमें क्या-क्या परिवर्तन आते हैं, आपके शरीर में, आपकी आवाज़ में, नज़र रखिये। * आपके बात करने का स्टाइल क्या है, pattern क्या है, जानिये। नज़र रखेंगे, तो ख़ुद को जानेंगे, जानेंगे, तो ख़ुद पर क़ाबू करना सीख जायेंगे, क़ाबू करेंगे, तो ख़ुद का इस्तेमाल करना आ जायेगा, और अभिनेता को ख़ुद का इस्तेमाल करना आना चाहिए। अभिनय करते हुए जब तक दर्शकों का डर, या कैमरे का डर किसी में है, तब तक वो अपने कल्पना के संसार में जा ही नहीं सकता। अतः ठीक से अभिनय कर ही नहीं सकता। इतने लोग मुझे देख रहे हैं। ना जाने मेरे Act को देख कर क्या सोच रहे होंगे। कहीं मुझ से कुछ ग़लती न हो जाये। अगर मैं डायलॉग भूल गया तो क्या होगा? पता नहीं मैं अच्छा Act कर भी पाऊँगा या नहीं। इनकी नज़र तो मुझ पर ही टिकी हुई है। मैं अच्छा करने की कोशिश करूंगा। मैं दर्शकों को खुश करने की कोशिश करूंगा। क्या मैं दुसरे Actors से अच्छा कर पाऊँगा? उफ़, उफ़, उफ़... इन सब ख्यालों को मन में मत आने दीजिये, please... ये ही इस डर का कारण होते हैं, nervousness का कारण होते हैं।
हर act से पहले एक्टर के ज़हन में सीन से सम्बंधित सवाल उठना ज़रूरी है। घटना क्या है, कब हुई, क्यों हुई, कहाँ हुई, कैसे हुई, इसके पीछे के सभी कारण क्या हैं, आदि सभी तरह के सवाल। जवाब आपको मिलेंगे (1) स्क्रिप्ट से (2) director से... और जब दोनों से जवाब पूरे न मिलें तो (3) स्वयं की कल्पना से, (4) Logical reasoning से। सीन ही नहीं, बल्कि आपके संवाद का एक-एक शब्द ढेरों सवाल छिपाये हुए होता है... उन सवालों को उठाइये, जवाब ढूँढ़िए....... "बिना logical जवाबों के act कर पाना संभव नहीं" ध्यान से सुनना अभिनेता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसमें बाहरी ध्वनियां व खुद की ध्वनि भी सुनना शामिल है। इससे आपकी performance अच्छी से, और बेहतर होती है। आइये इसके फायदे जानें : 1) उच्चारण - शब्दों का सही उच्चारण सुनें और अपने उच्चारण से तुलना कीजिये, आप अपनी भाषा में विलक्षण सुधार पाएंगे। 2) वाक्यों के अंत - संवाद बोलते हुए वाक्यों के अंत को ध्यान से सुनें, वे अक्सर बिगड़ जाते हैं, या धीमे पड़ जाते हैं, अथवा शब्द बिना पूरे उच्चारण के ही निकल जाते हैं। उन्हें ठीक कर सकते हैं आप। 3) वाक्यों का संगीत - अन्य अभिनेताओं द्वारा बोले गए संवादों की तीव्रता, गहनता, अर्थ, बोलने का उद्देश्य व उनमें निहित संगीत को समझने की क्षमता बढ़ती है, तथा आपका reaction और act, और प्रभावशाली हो उठता है। यही चीज़ें आप ख़ुद के संवादों में भी सुनें।
हिंदी उच्चारण... अभिनेताओं के लिए !! दिया गया टेबल आपको हिंदी के सभी अक्षरों के उच्चारण के सही तरीके को दर्शा रहा है। इस के अलावा उर्दू शब्दों के उच्चारण में भी लोग ग़लती करते हैं, उसके लिए इनमें अंतर करके बोलना सीख लीजिये, हो जायेगा... क - क़ ख - ख़ ग - ग़ ज - ज़ फ - फ़ र - ऱ ब - व स - श - ष क्ष ण - ड़ - ढ़ दिए गए टेबल को भी ध्यान से study कीजिये, लाभ होगा। वैसे तो सही उच्चारण ध्वनि सुनने से ही पता चलता है, प्रत्यक्ष होते आप, तो बेहतर समझ पाते। जल्द ही वीडियो प्रस्तुत करूँगा, उच्चारण के लिए। "Acting की एक ख़ास बात है... कि ये किसी दूसरे व्यक्ति की Life जीने का मौका देती है.. और हमें किसी को इसकी कीमत भी नहीं चुकानी पड़ती" ये शब्द हैं अमरीका के अभिनेता "रोबर्ट डे नीरो" के जिन्होंने अपने अभिनय से 2 ऑस्कर अवार्ड, और 1 गोल्डन ग्लोब अवार्ड जीते, तथा 21 बार अवार्ड्स के लिए nominate भी हुए। क्या आप दुनिया के सबसे बड़े अभिनय पुरस्कार - OSCAR AWARD के लायक तैयारी कर रहे हैं ?? जबड़े का पूरा इस्तेमाल करें Actors !! हम अक्सर बोलते हुए कुछ शब्दों को खा जाते हैं, यानि उनका अधूरा सा उच्चारण कर के आगे बढ़ जाते हैं। इस आदत के कारण डायलॉग्स में clarity नहीं आती, और auditions में reject हो जाते हैं। Dialogues में पूरा और सही उच्चारण develop करने के लिए जबड़े का पूरा इस्तेमाल करना सीखना चाहिए Actor को। एक exercise है : कोई हिंदी नाटक या कहानी लीजिये, उसे धीरे-धीरे पढ़िए। हर शब्द के हर अक्षर को पूरा उच्चारण दीजिये। "आ" की मात्रा हो तो पूरा जबड़ा खोल कर बोलें "ई" की मात्रा हो तो जबड़ा भींच कर बोलें "ऊ" की मात्रा हो तो होठों को छोटा करके पूरी गोलाई दें "ए" तो ठीक बोल ही लेते हैं आप "ऐ" की मात्रा में अए का उच्चारण बिलकुल सही होना चाहिए। बहुत लोग इसमें ज़रूर गलती करते हैं। "ओ" की मात्रा हो तो होठों को बड़ा गोलाकार दीजिये "औ" की मात्रा हो तो अओ का उच्चारण होता है। (इसमें भी बहुत ज़्यादा गलतियां करते हैं लोग) और इस तरह रोज़ाना प्रैक्टिस करें। धीरे-धीरे आपके शब्द और ज़्यादा clear होने लगेंगे।
Acting करते वक़्त आराम से रहें अभिनेता... Juss Relax !!! महान अभिनेता अपने पूरे करियर के दौरान अपने चेहरे और शरीर की मांसपेशियों को Relax करना सीखते रहते हैं। मंच पर अभिनय करते हुए तनाव आना स्वाभाविक है। आपकी आवाज पतली और ढुलमुल हो जाती है, और आपके actions और movements झटकेदार और बदसूरत हो जाते हैं। अभिनय के दौरान इस तरह की Stiffness और nervousness से बचने के लिए, जितना हो सके Relax होना जरूरी है। यहां तक कि अति-नाटकीय दृश्य भी अभिनेता से नपी-तुली शान्ति और एकाग्रता की मांग करता है। "So, act dramatic, but be calm inside, and don't work yourself up." अगर actor अपनी आवाज़ में सुरों के variations नहीं ला सकता तो वो बेकार है। स्पीच और डायलॉग्स में pitch के उतार-चढ़ाव की बड़ी महत्ता है। इसके बिना अभिनेता अपनी speech में रस नहीं ला सकता। इसलिये actor को सुर की exercise और practice करनी चाहिए। Base "सा" (मध्य सप्तक का 'सा') पर अधिक से अधिक रियाज़ करें, हारमोनियम का सहारा लें। फिर मध्य सप्तक के सभी स्वरों का रियाज़ करें। फिर मंद्र सप्तक और तार सप्तक का भी रियाज़ करें। आवश्यक नहीं कि आपको गाना आना चाहिए, पर सुरों पर पकड़ नहीं, तो आप अभिनय में कमज़ोर ज़रूर साबित होंगे। आप सोचेंगे, भावों के साथ भी तो variations आते ही हैं... तो मैं यही कहूंगा कि "उस गाड़ी को चलाने में मज़ा नहीं जिसका control आप ठीक से न जानते हों।" सुरों पर control... सीखिये।
Mental Block in Actor !! एक अभिनेता के career में एक्टिंग को लेकर कई बार blockage आता है। किसी सीन को करते हुए दिमाग रुक सा जाता है.. कई-कई बार कोशिश के बावजूद ये "मानसिक अवरोध" हटता नहीं। हालांकि इससे पार निकलने के बाद बड़ा प्रोत्साहन मिलता है। और पलट कर पीछे देखने पर हँसी आती है "कितना आसान हल था" ☺ 'पर पड़ी पर अड़ी, तो मुश्किल होती है घड़ी' ऐसे में ये उपाय: 1. उतावलापन परेशानी को और बढ़ाएगा, शांत हो जाएं। 2. अड़चन को पहले ठीक से समझें, उसका अवलोकन करें। 3. अपने किसी comfortable zone में आइये, relax होइये, फिर possibilities तलाश कीजिये। 4. फिर अपने दोस्त/साथी के सामने फिर से एक्ट करिये। 5. अब भी परेशानी हो तो अपने guide या टीचर से मदद लीजिये, और इस blockage को तोड़िये। (निर्देशक/गाइड/टीचर इस समय एक्टर पर pressure न दें, बल्कि सौम्यता से अभिनेता की सहायता करें ) आत्म-अनुशासन, Self Discipline एक अभिनेता (actor) के लिए अति अति महत्वपूर्ण है। और इसी की अधिकतर में कमी होती है। आलस त्याग कर यदि रोज़ाना खुद पर Physical और Mental workout किया जाये, और co-learners के साथ एक्टिंग की exercises भी रोज़ाना की जाये, तो आपकी growth बड़ी तेज़ी से होगी। समय कीमती है, और इसे बचाने के लिए self-discipline अपनाएँ, मन को भटकने से रोकें। हर रोज़ अपने लक्ष्य को याद करें, और खुद को उस लायक बनाने में जुट जाएँ। आपको अपनी राह से भटकने नहीं देगा आपका आत्म-अनुशासन।
IMAGINATION IS THE KEY HOLE TO... BEING AN ACTOR. कल्पना है आधार किसी भी अभिनय का। एक मज़बूत कल्पना के द्वारा रचित संसार में एक काल्पनिक व्यक्ति की भूमिका करते हुए काल्पनिक परिस्थितियों में जीते हुए... देखने वालों को भी उस संसार की सैर करवाना ही अभिनय है। बिना अभिनेता की मज़बूत कल्पना के ये सभी संभव नहीं है। कल्पना शक्ति को सुदृढ़ या मज़बूत बनाने के लिए आवश्यक है आपका अनुशासन के साथ हर रोज़ meditation करना... Regular और सही meditation आपकी imaginations को और मज़बूत करेगा। एक एक्टर को Logically सोचना, समझना आना चाहिए। लोगों के behaviour के subtext को समझने में ये सबसे ज़्यादा मदद करता है। नाटक या कहानी के उद्देश्य और लेखक के मंतव्य को बिना सही प्रकार समझे आप अभिनय के लिए तैयार हो ही नहीं सकते। छिपे हुए मतलब और किरदार के intention तक पहुंचना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है actor के लिए। तभी आप मौजूदा situation को सही emotions, सही pitch और actions के साथ निभा पाएँगे। "एक्टर के दो साज़, जिस्म और आवाज़" Actor अपने शरीर और आवाज़ से ही सब कुछ करता है, उसके यही दो माध्यम हैं । इन्हे मज़बूत, flexible बनाने के साथ इनको अपने control में भी करना ज़रूरी है । इसके लिए उसे शरीर को समझना ज़रूरी है, और इसके लिए हमें करनी है “self observation”… यानि खुद पर ध्यान देते हुए खुद को समझना है । आज ही से आप अपने ऊपर नज़र रखना शुरू कर दीजिये, कि आप क्या करते हैं, कब करते हैं, कैसे करते हैं, और क्यों करते हैं… cctv कमरे की तरह... और ये हर वक़्त चलते रहना चाहिए । Self observation में आपको क्या क्या observe करना है, उन observation points को नोट करें… Working of bones: किसी physical action को करते वक़्त आपके शरीर के कौन कौन सी हड्डियों के जोड़ कितना काम कर रहे हैं, यानि किस किस angle में वो मुड़ रहे हैं । Example के लिए आप फ्रिज खोल कर पानी पीते हैं… इस पूरे process में कई छोटे छोटे actions हैं… जैसे चलना, हाथ बढ़ा कर फ्रिज का दरवाज़ा खोलना, झुक कर बोतल निकालना, ढक्कन खोलना, बोतल को ऊपर लेजाकर झुकाना, मुंह खोलकर ऊपर करना वगैरह । हर छोटे से छोटे action में आपकी किन हड्डियों के कौन से joints ने कितना काम किया, इसे observe करना है । Working of muscles: इसी तरह शरीर की मांसपेशियों को भी observe करना है, किसी action को करते वक़्त कौन कौन सी मांसपेशियां कितना काम करती हैं । कितनी ताकत लगाने पर कितनी muscles use होती हैं । 👍Space: जिस जगह पर आपका action हुआ, उस जगह को ध्यान से observe करना है, कि वो कैसी है, वहाँ क्या क्या है, माहौल कैसा है, आसपास क्या क्या दिख रहा है । Time: ये भी observe कीजिये… समय क्या है ।


👍Situation: situation पर भी ध्यान दो, मौसम, temperature, आसपास हो रही घटनाएं उनको observe करो । 👍Motive: आपके उस काम को करने का motive क्या है ? चाहे वो कितना ही छोटा क्यों न हो, Motive का पता होना बहुत ज़रूरी है... क्योंकि बिना motive के आपके शरीर में कोई हरकत नहीं हो सकती । और ये बहुत important point है । 👍Thoughts: ये भी आपको observe करना है कि उस समय आपके मन में विचार क्या चल रहे हैं । क्योकि विचार ही भावो को जन्म देते हैं। Expressions: आपके भीतर उठ रहे भावो के कारण आपके शरीर में क्या परिवर्तन आ रहे हैं… जैसे पसीना आना, धड़कन तेज़ होना, सांस तेज़ होना, मुंह में पानी आना, आंसू आना, चेहरे के expressions… सब कुछ परखिए । ये हैं वो self observation points, जो आपको खुद के behavior और emotions को समझने में मदद करेंगे । ये Self observation process रुकना नहीं चाहिए… कभी भी… क्योकि आपकी life में हमेशा नयी नयी situations आती रहेंगी, और हर बार होगा आपका अलग behavior, और हर बार होगा कुछ नया सीखने को, observe करने को। 😊Observation को Acting का ठीक उलट कह सकते हैं । Observation करते हुए हम actions के ज़रिये, observation points तक पहुंचते हैं… और Acting में हम इन points को पकड़ते हुए action तक पहुंचते हैं । खैर अभी बहुत कुछ है जानने को... आगे और चर्चाएँ करेंगे।
1. अभिनय क्या है?
अभिनय किसी और या कुछ और होने का नाटक कर रहा है। यही वह है, है ना? या, यदि आप थोड़ा और विशिष्ट प्राप्त करना चाहते हैं: अभिनय तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका, व्यवहार, दृष्टिकोण इत्यादि लेता है, शायद किसी स्क्रिप्ट या फिल्म जैसे स्क्रिप्टेड वातावरण में। शायद। या जीवन में (?)
2. मैं सफल और खुश होने के लिए सीखने के लिए सभी को क्यों सलाह देता हूं लेकिन अगर अभिनय सिर्फ किसी और होने का नाटक कर रहा है, तो कोई भी ऐसा कर सकता है। वास्तव में, हम सब इसे करते हैं - हर दिन।
The fact of life and acting
• Seriously, can you actually get through a day without a moment of acting – of pretense? Perhaps you are not pretending to be someone else. But, how often in one day do you pretend? How often do you hide your truth? (The dictionary definition of pretending: “to act as if something were true”). For example, how often do you pretend to be pleased, or disappointed, or interested? How often do you hide your impatience, annoyance, anger or fear? We all do this. It’s a central part of the human condition. Sometimes it’s a matter of survival. Pretending is a technique we use to maneuver the rapids of daily existence. And this makes us all actors – to an extent. And then we could discuss those moments when we are accused of acting, of faking it, pretending or lying. And you know how often you can recognize when someone is not being authentic, honest, or truthful. Acting is a part of our lives, every day. Sanford Meisner eloquently stated: “Acting is the ability to live truthfully under imaginary circumstances.” For a common man, this means “pretending” In day to day life, this statement is how wonderfully simple, direct and true. But, what does it really mean? What does ‘living truthfully’ really entail?
क्या अभिनय सीखना और नाटक करना मुश्किल है?
सफलता और खुशी प्राप्त करने के लिए मुझे पता है, मेरे लिए, सचमुच (या ईमानदारी से) जीने के लिए कितना मुश्किल है, या पल-टू-पल। मुझे पता है कि मैं कितनी बार छुपाता हूं, नाटक करता हूं, या छेड़छाड़ करता हूं या अपनी सच्चाई छिपाता हूं। फिर भी, हमें यह समझना है कि हमारी गहरी सच्चाई में संशोधन वास्तव में, हम "उस पल" में कौन हैं, इसकी सच्चाई है। तो हम इस सच्चे झगड़े को सरल बनाने के लिए क्या करते हैं? अभिनय तकनीक सीखो 2. जानें कि आप कौन हैं; आपकी भावनाओं, दृष्टिकोण और आपकी सेट प्रतिक्रियाओं, शरीर की भाषा, इशारे, चलने आदि को किस प्रकार ट्रिगर करता है। 3. खुद को तटस्थ बनाने के लिए व्यायाम करें, लिखने के लिए एक खाली स्लेट और अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तत्काल कार्य करें 4. सफलता और खुशी यानी शरीर और मन के लिए अपने उपकरण को समझें 5. और जानें कि इस उपकरण को कैसे बदलें और तेज करें
एक अभिनेता को "अवलोकन" में क्यों शामिल होना चाहिए? जीने के लिए! एक अभिनेता का अवलोकन उनकी कल्पना के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण ट्रिगर है। यह ऐसा कुछ है जो किसी महत्वाकांक्षी अभिनेता को अपने आस-पास और छोटे विवरणों के बारे में अधिक जागरूक होने में मदद करेगा। यह उनकी भावना मेमोरी डेटा बैंक, कल्पना की शक्ति और अंततः एक स्क्रिप्ट के चरित्र को बनाने और बदलने की उनकी क्षमता को दृढ़ता से विकसित करता है। पेशेवर अभिनेता अद्भुत पर्यवेक्षक बन गए हैं और इस तरह वे खुद को शामिल करने में सक्षम हैं अन्य लोगों के जूते और उन्हें अन्य भूमिकाओं को करने का मौका देता है। अभिनेता जो अभी शुरू कर रहे हैं वे भूमिका निभाने में सक्षम होंगे जो उनके व्यक्तित्व को सबसे ज्यादा फिट करते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमेशा के लिए एक ही भूमिका निभाएंगे। बेहतर बनने के लिए, आपको अपने अवलोकन कौशल में सुधार करना होगा और यह आपको कभी भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता बनने में मदद करेगा। यह मेरा पसंदीदा है क्योंकि यह आसान है। आपको रिहर्सल स्पेस, विशेष उपकरण या ए की आवश्यकता नहीं है समर्पित समय इसे "निरीक्षण" कहा जाता है, और मुझे पूरा यकीन है कि मैं आपको इसके बारे में बताने वाला पहला व्यक्ति नहीं हूं। लेकिन यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है इसलिए मुझे लगता है कि यह विचार करने लायक है।
उपन्यास या किसी भी किताबें और अधिक पढ़ें अभिनेता को चेहरा अभिव्यक्ति में सुधार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए

Hindi Tongue Twisters एक अभिनेता के रूप में आपका हिंदी सही होना चाहिए। हिंदी टंग ट्विस्टर उपलब्ध हैं जो आप अभ्यास कर सकते हैं
madan, mohan, malveya madras mein machhli maarte maarte mare
Chaar Kachari Kachche Chacha, Chaar Kachari Pakke. Pakki Kachari Kachche Chacha, Kachchi Kachari Pakke!
Khadak Singh ke khadakane se khadakati hain khidkiyan, khidkiyon ke khadakane se khadakata hai Khadak Singh.
Jo hase ga wo fase ga. Jo fase ga wo hase ga.
Chandu ke chacha ne chandu ki chachi ko chandni-chowk mein chaandi ki chammach se chatni chackaee.
Samajh samajh ke samajh ko samjho. Samajh samajh ke samajh ko samajhna hi samajh hai. Jo samajh ko samajh kar bhi na samajhe Voh....kya hai? Nasamajh hai.
kaccha papad, pakka papad.
mar ham bi gaye, marham ke liye, marham na mila. ham dam se gaye, hamdam ke liye, hamdam na mila
nazar nazar me har ek naraz me hume us nazar ki talash thi. wo narazar mili to sahi par us nazar me ab wo nazar kahan thi.
रोजाना 10 बार इस टंग ट्विस्टर्स का अभ्यास करें।

Dipak Khetiya
Actor/Model
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